चार दीवारें छत्त और मैं
रात सावली एक सहेली गोरा चिट्टा दिन है दोस्त
टहलने निकली अकेली परछाई , मैं भी उसके पीछे चलूँ
नीले अम्बर के कागज़ पर पंछी होकर चित्र बनूँ
इंद्रधनुष की तिरछी डाली पर चिपकी गीली गीली ओस
घर में है बस ६ ही लोग
चार दीवारें , छत्त और मैं
--अब तक छप्पन
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