विवेक मेरा दोस्त
दुविधा सबके जीवन का हिस्सा है | ये हर घड़ी और हर जगह हो सकती है और ये आपको दोराहे या तिराहे पे लेके पटक देती है अक्सर | इससे बचा कैसे जाये ? विवेक को अपना दोस्त बना के |समय दे अपने आप को , चित्त को स्थिर करने की कोशिस करें अपने विश्वनीय लोगों की सलाह ले | पर अंत में फैसला आप का ही होना चाइये | जिसे आपने अपने विवेक से लिया है|
फैसला लेना बहुत ही तुत्छ काम लगता है पर होता नहीं है , आपके जीवन को प्रभावित करते है , किन्तु अगर फैसला में कठोरता आजाये तो सब सही हो जाता है अंत में |
सारे फैसले जो हम करते है निश्चित रूप से हमारे अनुकूल नहीं होता , पर जब आप सोच विचार कर अपना फैसला लेते हैं और उससे साबित करने का ठान लेते हैं तो वो अंत में सही और अनुकूल बन ही जाता है |
फैसला लेना बहुत ही तुत्छ काम लगता है पर होता नहीं है , आपके जीवन को प्रभावित करते है , किन्तु अगर फैसला में कठोरता आजाये तो सब सही हो जाता है अंत में |
सारे फैसले जो हम करते है निश्चित रूप से हमारे अनुकूल नहीं होता , पर जब आप सोच विचार कर अपना फैसला लेते हैं और उससे साबित करने का ठान लेते हैं तो वो अंत में सही और अनुकूल बन ही जाता है |

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