युद्ध
युद्ध स्वयं का स्वयं से
हम दूसरों से आसानी से लड़के जीत या कम से कम हार तो सकते हैं ही | किन्तु जो युद्ध हमारे अंदर है वो न जितने योग्य और न हरने योग्य होती है | जब हमें पता नहीं चलता की हम जिससे लड़ रहे वो हमारा सखा है या शत्रु |
तब जो हमें जो संभालती है वो हमारा नाम |
"नाम अनाम अनंत रहत है
दूजा तत्त्व ना होई हो
दूजा तत्त्व ना होई"
हम दूसरों से आसानी से लड़के जीत या कम से कम हार तो सकते हैं ही | किन्तु जो युद्ध हमारे अंदर है वो न जितने योग्य और न हरने योग्य होती है | जब हमें पता नहीं चलता की हम जिससे लड़ रहे वो हमारा सखा है या शत्रु |
तब जो हमें जो संभालती है वो हमारा नाम |
"नाम अनाम अनंत रहत है
दूजा तत्त्व ना होई हो
दूजा तत्त्व ना होई"


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