अपरिवर्तन परिवर्तन
परिवर्तन रिश्तों में , परिवर्तन परिवेश में , परिवर्तन रहन सहन में , नौकरियों में , जगहों में , हर परिवर्तन हमें कूच हमारी प्रिय चीजों से जुदा कर ही देती है| शायद यही कारण है की हमें ये अच्छी नै लगती | कई दफा तो पूरी जिन्दी उलट पुलट सी जाती है | एक बेटी जब अपने मा बाप का घर छोड़ सहसा एक अनजान घर में जाती है तो उसकी व्यथा शायद वही बयां कर सकती सकती है | नया घर नए लोग नयी सोच और कई संकीर्णताएं |
मैं अत्यंत भावुक व्यक्ति हूँ , परिवर्तन मुझे जरा रास नई आती | 12 की कक्षा पास कर जब मैं इंजीनियरिंग करने पहली बार घर से दूर गया बहुत ही असमंजस वाली स्थिति थी | उसी प्रकार जब इंजीनियरिंग ख़तम हुआ दोस्तों से बिछड़ना कितना दुखदायी था उसे शायद बयां न कर सकूँ | मुझे याद है मैं आखरी व्यक्ति था वहां से जाने वाला , पर जान MTech करने गया NIT तो वहां नए दोस्त मिले और शायद पुराने दोस्तों की कमी थोड़ी काम खली | परिवर्तन चाहे अच्छा हो या बूरा वो हमें एक नए परिवेश में धकेल देती हैं जो हमें अच्छा नहीं लगता | हमें उन्ही रिश्तों उन्ही जगहों से जुड़े रहना चाहते हैं क्यूंकि हमें डर होता है की भविष्य के गर्भ में कहीं बुरी चीजें न मिल जाए |
अभी पिता जी रिटायर हो गए , और गाओं चले गएँ हैं , जिंदल स्टील की कालोनी में जो माहौल था और जो रहन सहन था जो दिनचर्या था उससे कहीं परे है गांव की जिंदगी | चाँद दिनों के लिए त्योहारों में गांव जाना और रहने के लिए जाना ये दो बहुत ही भिन्न सी बातें हैं |
पर शायद हमें परिवर्तन को हसके स्वीकार करना चाइये न की उसे डरते हुए , क्यूंकि परिवर्तन का जड़त्व इतना विकराल है की उसे स्वयं काल भी नहीं रोक सकती |
परिवर्तन से भयभीत होने के बजाये उसे स्वीकार करलेना ही हमारे लिए अच्छा है |

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