Dharma and adharma
छल और धोखा चाहे धर्म के ही लिए क्यों न हो अधर्म ही होता है ! आज कल छल और कपट को बुद्धिमत्ता की संज्ञा दी जा रही है जो की सर्वथा अनुचित है ! अपना उल्लू सीधा करने वाले लोगों को लगता है की वे बहुत होशियार हैं पर ऐसा करना केवल मात्रा उनकी निर्बलता को दर्शाता है ! हो सकता है छल कपट के डैम पर लोग तुमसे आगे निकल जाएँ पर इतना स्मरण रहे की उन्हें मानसिक शांति कभी प्राप्त नहीं होसकती ! अतएव हमें परेश करें की भुद्धिमान बने कपटी नहीं छली नहीं !
कुत्छ लोग धर्म के नाम पर छल का औचित्य साबित करने का प्रयास करते हैं पर वह अधर्म ही माना जान चाहिए !

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